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Oh Pilani Redux

A sequel…

Lyrics by Sunil Sapra

कदम थम गये…
रुक गयी हैं राहें….
ऐसा क्यूँ लगे है मुझे,
कोई पुकार रहा,
फैला कर अपनी बाहें

मैं तो हूँ सात समंदर पार… यहाँ तो कोई आता नही
क्यूँ लगने लगा अचानक, कि इन राहों से अब मेरा नाता नही…

एक ठंडी हवा का झोंका
हल्के से गुदगुदा गया
जैसे सदियों के बाद
कोई बिछड़ा याद आ गया

क्या यह तुम हो
सुन कर जिसकी सदा
भीड़ में हूँ, पर हो गया सबसे जुदा

तुम तो मेरी नसों में बसे हो,
तुम से जुदा मैं हुआ ना कभी
तो क्यूँ तुम्हारी यादों का सैलाब,
तोड़ रहा आज साहिल सभी

तुझे देखने की आरज़ू…..
तुझसे मिलने की आस लिए,
फिर से आ रहा हूँ एक बार
साँसों में तेरी खुश्बू का एहसास लिए

और साथ अपने ला रहा हूँ, किसी को तुझसे मिलाने
ये है मेरा आने वाला कल, जो देगा अपने रिश्ते को नये माने…

तेरी यादें…..
तेरी यादें…..
कभी कैसे हों पुरानी….
ओ, पिलानी…
ओ, पिलानी….